पीछे हटो नफ़रत के रास्ते से ! युवाओं को नफ़रत का रास्ता आजकल बहुत ही उत्तेजक लगता है। राजनेता अपनी राजनीति चमकाने युवाओं को नफ़रती घोल पिलाते रहते है। ये नफ़रत का नशा कराना ही उनका काम हो गया है


मीडिया भी युवाओं में नफ़रत का उन्माद भरने मे कोई कसर नहीं छोड़ता। हर खबर को नफ़रती एजेंडा मे फिट करके पेश किया जाता है। युवाओं मे कुट कुट कर नफ़रत भरी जाती है।


सोशल मीडिया भी अपना खेल खेलता है। नफ़रत के नशे मे डूबे युवाओं को अपने खास अलगोरीथम से नफ़रती कंटेंट ही दिखता है। इतना ही नहीं, ये कंटेंट बार बार दिखाया जाता है। चाहे कंटेंट झूठा हो, फेक हो, फिर भी दिखाया जाता है


कभी सोचा है इससे क्या होता है? युवा एक नफ़रती इंसान बन जाता है और जरा से उकसावे से मानव बम मे तब्दील हो जाता है। वो एक हत्यारा तक बन सकता है।


इसका अंजाम क्या आता है? नफ़रती युवा बाहेकावे मे आ कर दंगा कर देता है। किसी की हत्या तक कर देता है। ऐसी घटना से राजनेताओं को सीधा सीधा फायदा मिलता है। लेकिन उस युवा का क्या होता है??


ऐसे युवा अचानक ही कानून के हाथ पड़ जाते है। फायदा राजनेताओं को मिलता है लेकिन ऐसे युवाओं को मिलता है अंधकारमय भविष्य। उनके परिवार को मिलते हैं कोर्ट कचहरी के चक्कर।


ये बात भी गौर से सोचे कि क्या कोई राजनेता अपने बेटे बेटी को नफ़रती एजेंडा के ग्राउंड मे उतारते हैं? क्यो सिर्फ आम युवा ही ऐसे काम करते हैं? क्यो राजनेताओं के बच्चे झंडे ले कर नहीं निकलते? क्यो वो विदेश पढ़ते हैं?


नफ़रत की राजनीति को अपना "धर्म" समझने वाले हमारे युवाओं और उनके परिवारों को ये बात जरूर सोचनी चाहिए। भारत माता की जय।


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